-मैं दुःखी हूँ ।
क्यों ??
-क्योंकि मेरी
मनचाही न हुई ।
तो ?
-तो क्या,
दिल दुखा
और क्या ।
क्यों दुखा ?
-क्यों न दुखे ?
वो मेरी नहीं ?
वो मेरा नहीं ?
मेरा कोई हक़ नहीं ?
मेरा कोई मान नहीं?
सम्मान नही ?
अरे सुन !! मना बावरे*
तेरा सच में कुछ नहीं
तू तो है निमित्त मात्र,
इस खेल का सिर्फ एक पात्र ।
जितना करेगा मोह
उतना मिलेगा दर्द
ये मैं – मेरे को छोड़
है सब पुराने ये क़र्ज़ ।
वो तो प्रकृति
के है बेटा – बेटी
हो माता – पिता
दोस्ती – यारी या
बहन हो या भाई
है सारे रिश्ते
प्रारब्ध की कमाई ।
अरे सुन !! मना बावरे*
तू है सिर्फ निमित्त
बच्चों को बड़ा और
देखभाल माँ बाप की
करने के लिए ।
निभा कर्त्तव्य अपने
तटस्थ भाव से
फिर न होगा
कोई भी दुःख
समझे मना बावरे*।
मना बावरे* – पागल / चंचल मन ।
“This post is published for #OpenNTalk Blogger’s League hosted by Gleefulblogger & Wigglingpen in association with SummerBarn, Vedantika Herbals, Nyassa, Explore Kids World.“

I am a member of Team 3 #InvincibleGang. Read some more interesting posts this June from my team members. Here they are and do not miss to follow them on twitter for more updates –

1. Geethica Mehra – Thoughts By Geethica
2. Papri Ganguly – Through My Pink Window
3. Princy Khurana – Clanpedia
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