Thursday, 21 June 2018

पुस्तक समीक्षा – मनसा eBook Review – Mansa by Rashi Roy

 

पुस्तक का नाम – मनसा ।

लेखिका – राशी रॉय ।

शैली – कविताएं ।

यूँ तो  “मनसा” अर्थात मन से उत्पन्न  कुछ कवितायेँ होता है , परन्तु लगता है कवियत्री ने पाठक के मन में भी झाँका हैं |

 

मैं समझ नही पा रही हूँ कि शुरुआत कहाँ से और कैसे करूँ । इतनी बेहतरीन और उम्दा कविताओं को पढ़कर मैन प्रफुल्लित हो गया । हालांकि कविताओं की संख्या सिर्फ ८ है, परन्तु उनमे जो भाव है वो अनगिनत है । किताब तीन भागों में है । कवित्री ने पहले भाग “रिश्ते” में किसी भी इंसान के सबसे महत्वपूर्ण दो रिश्ते ‘माँ’ और ‘पिता’ के ऊपर अदभुद रचनाये रची है । दूसरे भाग”देशप्रेम” में हमारे देश के प्रति जो वीर रस की रचना की है वो अवश्य ही पाठकों के हृदय में भाव उत्पन्न करेंगे । तीसरे और अंतिम भाग में इन्होंने “मन से” निकली कुछ कविताएं लिखी है जो सीधे सीधे पाठक के मन को छूती है ।

 

एक बात जो मुझे नही भाई वो ये की एक बार पढ़ना शुरू करते ही बहुत जल्द समाप्त हो गई । अगर कुछ और कविताये होती तो बेहतर होता ।

 

कुछ अंश जो मेरे मन को भा गए  –

 

माँ –

ये बात जुबां पे कभी आयी नहीं की मुझको कितना प्यार है माँ से,

सच तो ये है की मेरी हर सांस है माँ से |

 

बाबा – 

आज भी रोती हूँ छुपके जब भी बाबा की याद आती है..

 

अगर आप कविताओं में रूचि रखते है तो आपको यह पुस्तक अवश्य पढनी चाहिए | अपनी प्रति डाउनलोड करे यहाँ से

 

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